श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान के कुंडली की गणना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.3.12 
মহা-জ্যোতির্-বিত্ বিপ্র সবার অগ্রেতে
লগ্নে অনুরূপ কথা লাগিল কহিতে
महा-ज्योतिर्-वित् विप्र सबार अग्रेते
लग्ने अनुरूप कथा लागिल कहिते
 
 
अनुवाद
तब उस महान ज्योतिषी ब्राह्मण ने उपस्थित सभी लोगों के समक्ष बालक की कुंडली में विभिन्न भावों के लक्षणों के बारे में बोलना प्रारम्भ किया।
 
Then that great astrologer Brahmin started speaking about the characteristics of different houses in the boy's horoscope in front of all the people present.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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