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श्लोक 1.2.85  |
এই-মত অদ্বৈত বৈসেন নদীযায
ভক্তি-যোগ-শূন্য লোক দেখি’ দুঃখ পায |
एइ-मत अद्वैत वैसेन नदीयाय
भक्ति-योग-शून्य लोक देखि’ दुःख पाय |
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| अनुवाद |
| इस प्रकार अद्वैत आचार्य लोगों की भक्ति की कमी के कारण बड़े कष्ट में नादिया में रहने लगे। |
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| Thus Advaita Acharya started living in Nadia in great distress due to lack of devotion of the people. |
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