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श्लोक 1.2.82  |
হুঙ্কার করযে কৃষ্ণ-আবেশের তেজে
যে ধ্বনি ব্রহ্মাণ্ড ভেদি’ বৈকুণ্ঠেতে বাজে |
हुङ्कार करये कृष्ण-आवेशेर तेजे
ये ध्वनि ब्रह्माण्ड भेदि’ वैकुण्ठेते बाजे |
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| अनुवाद |
| उन्होंने परम आध्यात्मिक आनंद में ऊँचे स्वर में कृष्ण को पुकारा। वह ध्वनि-कंपन ब्रह्मांड के आवरण को भेदकर वैकुंठ लोकों में सुनाई दी। |
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| In supreme spiritual ecstasy, he called out to Krishna in a loud voice. The sound vibrations pierced the cosmic veil and were heard in the Vaikuntha realms. |
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