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श्लोक 1.2.80  |
ত্রিভুবনে আছে যত শাস্ত্রের প্রচার
সর্বত্র বাখানে,—’কৃষ্ণ-পদ-ভক্তি সার’ |
त्रिभुवने आछे यत शास्त्रेर प्रचार
सर्वत्र वाखाने,—’कृष्ण-पद-भक्ति सार’ |
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| अनुवाद |
| उन्होंने तीनों लोकों में पाए जाने वाले सभी शास्त्रों की व्याख्या की और निष्कर्ष निकाला कि कृष्ण के चरणकमलों की भक्ति ही सभी शिक्षाओं का सार है। |
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| He interpreted all the scriptures found in the three worlds and concluded that devotion to the lotus feet of Krishna is the essence of all teachings. |
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