श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान का अवतरण  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  1.2.79 
জ্ঞান-ভক্তি-বৈরাগ্যের গুরু মুখ্যতর
কৃষ্ণ-ভক্তি বাখানিতে যেহেন শঙ্কর
ज्ञान-भक्ति-वैराग्येर गुरु मुख्यतर
कृष्ण-भक्ति वाखानिते येहेन शङ्कर
 
 
अनुवाद
श्री अद्वैत आचार्य परम पूजनीय गुरु थे। वे ज्ञान और वैराग्य के साथ भगवान कृष्ण की भक्ति की व्याख्या करने में भगवान शिव के समान ही कुशल थे।
 
Sri Advaita Acharya was a highly revered guru. He was as skilled as Lord Shiva in explaining devotion to Lord Krishna with wisdom and detachment.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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