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श्लोक 1.2.64  |
ধর্ম কর্ম লোক সবে এই মাত্র জানে
মঙ্গলচণ্ডীর গীতে করে জাগরণে |
धर्म कर्म लोक सबे एइ मात्र जाने
मङ्गलचण्डीर गीते करे जागरणे |
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| अनुवाद |
| लोगों का धर्म सकाम कर्मों पर आधारित था और वे रात भर जागकर मंगलचण्डी, देवी दुर्गा की प्रार्थना करते थे। |
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| The religion of the people was based on selfish actions and they used to stay awake all night and pray to Mangalchandi, Goddess Durga. |
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