श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान का अवतरण  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  1.2.55 
’নবদ্বীপ’-হেন গ্রাম ত্রি-ভুবনে নাই
যঙ্হি অবতীর্ণ হৈলা চৈতন্য-গোসাঞি
’नवद्वीप’-हेन ग्राम त्रि-भुवने नाइ
यङ्हि अवतीर्ण हैला चैतन्य-गोसाञि
 
 
अनुवाद
तीनों लोकों में नवद्वीप के समान कोई स्थान नहीं है, जहाँ भगवान श्री चैतन्य प्रकट हुए हों।
 
There is no place like Navadvipa in the three worlds, where Lord Sri Chaitanya appeared.
तात्पर्य
भौतिक जगत में चौदह लोक हैं। इनमें से, भूः, भुवः और स्वः मुख्यतः भौतिकवादी व्यक्तियों द्वारा निवास किए जाते हैं। इन तीनों लोकों में से, इस पृथ्वी ग्रह का जम्बूद्वीप सर्वश्रेष्ठ है; जम्बूद्वीप में भारत-वर्ष सर्वश्रेष्ठ है; भारत-वर्ष की भूमि में, गौड़-मंडल जो श्री वृंदावन-मंडल से भिन्न नहीं है, सर्वश्रेष्ठ है; और गौड़-मंडल में, श्री नवद्वीप के सबसे पवित्र नौ द्वीप सर्वश्रेष्ठ हैं। तीनों लोकों में नवद्वीप से श्रेष्ठ कोई स्थान नहीं है, क्योंकि श्री गौराहरी, दया के सर्व-कल्याणकारी सागर, ने भगवान के प्रेम का प्रसार किया, जो कि देवताओं द्वारा भी दुर्लभ रूप से प्राप्त किया गया है, किसी को भी और सभी को इस बात पर विचार किए बिना कि वे योग्य प्राप्तकर्ता थे या नहीं। इसलिए श्री नवद्वीप की महिमा वास्तव में अतुलनीय और अद्वितीय है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)