ত্রিহুতে পরমানন্দ-পুরীর প্রকাশ
নীলাচলে যাঙ্র সঙ্গে একত্র বিলাস
त्रिहुते परमानन्द-पुरीर प्रकाश
नीलाचले याङ्र सङ्गे एकत्र विलास
अनुवाद
परमानंद पुरी, जिन्होंने नीलांचल में भगवान के साथ लीला का आनंद लिया था, त्रिहुत में प्रकट हुए।
Paramananda Puri, who had enjoyed pastimes with the Lord at Nilachal, appeared at Trihuta.
तात्पर्य
तिरहुता में वर्तमान समय में मुजफ्फरपुर, दरभंगा और छपरा नामक जिले सम्मिलित हैं। अपने पिछले आश्रम में, श्री परमानंदपुरी तिरहुता में रहा करते थे। वे श्री माधवेंद्रपुरीपाद के प्रिय शिष्य थे। नीलचल में परमानंदपुरी से संबंधित विभिन्न विषयों, जैसे उनका कुआँ आदि का वर्णन इस पुस्तक के अंतिम भाग में किया गया है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥