श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान का अवतरण  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  1.2.38 
রাঢ-মাঝে ’একচাকা’-নামে আছে গ্রাম
যঙ্হি অবতীর্ণ নিত্যানন্দ ভগবান্
राढ-माझे ’एकचाका’-नामे आछे ग्राम
यङ्हि अवतीर्ण नित्यानन्द भगवान्
 
 
अनुवाद
परम भगवान् नित्यानंद प्रभु राधा-देश के एकचक्रा गाँव में प्रकट हुए।
 
The Supreme Lord Nityananda Prabhu appeared in the village of Ekachakra in Radha-desa.
तात्पर्य
यह गाँव पूर्व में एकाचाका या एकचक्र के नाम से जाना जाता था। अब इसे वीरचंद्रपुरा और गर्भवास के नाम से जाना जाता है। यह मल्लारपुरा स्टेशन से 8 मील दूर स्थित है। यह स्टेशन ई.आई.आर. लूप लाइन पर है।

भागवत गीता (2.72) पर अपनी टीका में माधवाचार्य ने पद्म पुराण के इस अंश को उद्धृत किया है: “अपनी मधुर इच्छा से वह विभिन्न रूपों का प्रदर्शन अपनी आंतरिक क्षमता से करता है। वह देवकी के गर्भ में वासुदेव से प्रकट नहीं हुआ। वह दशरथ से या जमदग्नि से जन्म नहीं लिया। बल्कि, वह परम आनंद का आनंद लेता है, जो शुद्ध, द्वंद्व रहित है।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)