श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान का अवतरण  »  श्लोक 231
 
 
श्लोक  1.2.231 
অন্যো ’ন্যে আলিঙ্গন, চুম্বন ঘন-ঘন,
লাজ কেহ নাহি মানে রে
নদীযা-পুরন্দর- জনম-উল্লাসে,
আপন-পর নাহি জানে রে
अन्यो ’न्ये आलिङ्गन, चुम्बन घन-घन,
लाज केह नाहि माने रे
नदीया-पुरन्दर- जनम-उल्लासे,
आपन-पर नाहि जाने रे
 
 
अनुवाद
नादेय के स्वामी के जन्म पर अत्यन्त प्रसन्न होकर देवतागण बार-बार एक-दूसरे को गले लगाते हैं और चूमते हैं, बिना किसी संकोच या विचार के कि कोई उनका मित्र है या अजनबी।
 
Overjoyed at the birth of the lord of Nadey, the gods repeatedly embrace and kiss each other, without any hesitation or consideration as to whether one is their friend or a stranger.
तात्पर्य
शब्द anyo 'nye का अर्थ है "एक दूसरे के बीच।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)