श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान का अवतरण  »  श्लोक 230
 
 
श्लोक  1.2.230 
আনন্দে ইন্দ্রপুর, মঙ্গল-কোলহাল,
সাজ’ সাজ’ বলি’ সাজ’ রে
বহুত পুণ্য-ভাগ্যে, চৈতন্য-পরকাশ
পাওল নবদ্বীপ-মাঝে রে
आनन्दे इन्द्रपुर, मङ्गल-कोलहाल,
साज’ साज’ बलि’ साज’ रे
बहुत पुण्य-भाग्ये, चैतन्य-परकाश
पाओल नवद्वीप-माझे रे
 
 
अनुवाद
इस प्रकार अमरावती के निवासी आनंद में डूब जाते हैं और भगवान के दर्शन के लिए सज-धज कर एक शुभ हलचल मच जाती है। "हमारे सौभाग्य से हम नवद्वीप में श्री चैतन्य के दर्शन करेंगे।"
 
Thus the residents of Amaravati are immersed in joy and there is an auspicious commotion as they dress up for the darshan of the Lord. "By our good fortune we will have the darshan of Sri Chaitanya in Navadvipa."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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