श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान का अवतरण  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  1.2.22 
কলি-যুগে ’ধর্ম’ হয ’হরি-সঙ্কীর্তন’
এতদ্ অর্থে অবতীর্ণ শ্রী-শচী-নন্দন
कलि-युगे ’धर्म’ हय ’हरि-सङ्कीर्तन’
एतद् अर्थे अवतीर्ण श्री-शची-नन्दन
 
 
अनुवाद
कलियुग का धार्मिक सिद्धांत भगवान के पवित्र नामों का सामूहिक जप है। श्री शचीनंदन इस सिद्धांत को स्थापित करने के लिए अवतार लेते हैं।
 
The religious principle of Kaliyuga is the congregational chanting of the holy names of the Lord. Sri Sachinandan incarnates to establish this principle.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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