श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान का अवतरण  »  श्लोक 211
 
 
श्लोक  1.2.211 
দুন্দুভি বাজে, শত শঙ্খ গাজে,
বাজে বেণু-বিষাণ
শ্রী-চৈতন্য-ঠাকুর, নিত্যানন্দ-প্রভু
বৃন্দাবন-দাস গান
दुन्दुभि बाजे, शत शङ्ख गाजे,
बाजे वेणु-विषाण
श्री-चैतन्य-ठाकुर, नित्यानन्द-प्रभु
वृन्दावन-दास गान
 
 
अनुवाद
नगाड़े बजाए गए, सैकड़ों शंख बजाए गए, बाँसुरी और नरसिंगे बजाए गए। इस प्रकार वृंदावन दास ठाकुर श्री चैतन्य महाप्रभु और श्री नित्यानंद प्रभु की महिमा का गान करते हैं।
 
Drums were beaten, hundreds of conch shells were blown, flutes and horns were played. Thus Vrindavana Dasa Thakura sang the glories of Sri Chaitanya Mahaprabhu and Sri Nityananda Prabhu.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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