श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान का अवतरण  »  श्लोक 210
 
 
श्लोक  1.2.210 
দেখিতে গৌরাঙ্গ-চন্দ্র
নদীযার লোক- শোক সব নাশল,
দিনে দিনে বাডল আনন্দ
देखिते गौराङ्ग-चन्द्र
नदीयार लोक- शोक सब नाशल,
दिने दिने बाडल आनन्द
 
 
अनुवाद
नादिया के लोगों की खुशी दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही थी और उनका शोक तब दूर हो गया जब उन्होंने चन्द्रमा के समान भगवान गौरांग को देखा।
 
The happiness of the people of Nadia was increasing day by day and their grief was dispelled when they saw Lord Gauranga who resembled the moon.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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