श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान का अवतरण  »  श्लोक 208
 
 
श्लोक  1.2.208 
হেনৈ সমযে সর্ব-জগত্-জীবন
অবতীর্ণ হৈলেন শ্রি-শচী-নন্দন
हेनै समये सर्व-जगत्-जीवन
अवतीर्ण हैलेन श्रि-शची-नन्दन
 
 
अनुवाद
उसी क्षण समस्त जीवों के प्राण श्री शचीनंदन प्रकट हुए।
 
At that very moment, Shri Sachinandan, the soul of all living beings, appeared.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)