अनर्पित-चरीं चिरत् करुणयावतीर्णः कलौ
समर्पितुमुन्नतोjjवल-रसां स्व-भक्ति-श्रीयम्
हरिः पुरट-सुंदर-द्युति-कदंब-संदिप्तः
सदा हृदय-कंदरे स्फुरतु वः शची-नंदनः
"श्रीमती शचिदेवी के पुत्र के रूप में विख्यात सर्वोच्च भगवान, आपके हृदय के अंतरतम कोर में पारलौकिक रूप से स्थित हो सकते हैं। पिघले हुए सोने की चमक से सुशोभित, वह कलियुग में अपनी अकारण दया से अवतरित हुए हैं और ऐसा कुछ प्रदान कर रहे हैं जो किसी भी अवतार ने पहले कभी नहीं दिया है: भक्ति सेवा का सबसे उन्नत आनंद, प्रेम का आनंद।"
