यह तर्क दिया जा सकता है कि महान ऋषि और भक्त राजा धार्मिक सिद्धांतों के पतन का प्रतिकार करने और अधार्मिक प्रथाओं की वृद्धि को रोकने के लिए योग्य हैं, तो तुम्हारे आने की क्या आवश्यकता है? यह सच है। लेकिन साधुओं को मुक्त करना, दुष्टों का विनाश करना और धर्म के सिद्धांतों को पुनः स्थापित करना दूसरों के लिए करना असंभव है, इसलिए मैं व्यक्तिगत रूप से प्रकट होता हूँ। साधुओं को मुक्त करने का अर्थ है बिना किसी लोभ के भक्तों को मुझे देखने की तीव्र इच्छा की पीड़ा से मुक्त करना। दुष्कृत का अर्थ रावण, कंस और केशी जैसे राक्षस हैं, जो दूसरों के लिए अजेय हैं और जो मेरे भक्तों को कष्ट देते हैं। धर्म-संस्थापन का अर्थ मेरे ध्यान, पूजा, सेवा और महिमा के रूप में सर्वोच्च व्यवसायिक कर्तव्य है, जिसे मेरे अलावा कोई नहीं कर सकता। युग युग का अर्थ प्रत्येक सहस्राब्दी या कल्प है। जब भगवान राक्षसों को मारते हैं तो भगवान की निष्पक्षता पर संदेह नहीं करना चाहिए, क्योंकि जिन राक्षसों को भगवान के हाथों से मारा जाता है, उन्हें नारकीय भौतिक जीवन से मुक्ति मिल जाती है, जो उन्हें उनके पापपूर्ण कार्यों के कारण दिया गया है। भगवान द्वारा राक्षसों को दिया गया यह दंड भी उनकी दया है। (श्रीमद विश्वनाथ चक्रवर्ती)
साधुओं को मुक्त करने का अर्थ है कि भगवान अपने भक्तों को भगवान को देखने की प्रबल उत्सुकता के संकट से मुक्त करते हैं। क्योंकि भक्त लगातार भगवान के रूप और गुणों को याद करने में लगे रहते हैं, उनकी भगवान को देखने की प्रबल इच्छा होती है, जो उनके सामने अपने मनोरम रूप को प्रकट करते हैं। दुष्कृत का अर्थ रावण और कंस जैसे राक्षस हैं, जो भक्तों के विरोधी हैं और जिन्हें भगवान को छोड़कर कोई नहीं मार सकता। धर्म का अर्थ भगवान की पूजा करने और उनके स्वरूप पर ध्यान करने की शुद्ध भक्ति प्रक्रिया है। हालाँकि भक्ति सेवा की यह प्रक्रिया नियमित सिद्धांतों के आधार पर की जाती है, लेकिन इसे अन्य लोगों द्वारा प्रचारित नहीं किया जा सकता है। संस्थापन शब्द का अर्थ है उचित प्रचार करना। ये तीन उद्देश्य भगवान के प्रकट होने का कारण हैं। जब भगवान राक्षसों को मारते हैं तो किसी को भी भगवान की निष्पक्षता पर संदेह नहीं करना चाहिए, क्योंकि जो राक्षस भगवान के द्वारा मारे जाते हैं वे मोक्ष प्राप्त करते हैं। राक्षसों की यह सज़ा भगवान की दया का प्रदर्शन है। (श्री बलदेव विद्याभूषण)
मैं अपने भक्तों के बीच एक सशक्त अवतार के रूप में प्रकट होकर वर्णाश्रम-धर्म की स्थापना करता हूँ, जो ब्राह्मणों और राजाओं में ऋषि होते हैं, लेकिन वास्तव में मैं अपने महान भक्तों को मुक्त करने के लिए प्रकट होता हूँ जो मुझे देखने की तीव्र लालसा से पैदा हुए संकट से पीड़ित हैं। इस प्रकार, युग-अवतार के रूप में, मैं अपने भक्तों को इस संकट से मुक्त करता हूँ और रावण और कंस जैसे राक्षसों को मारकर मुक्त करता हूँ। मैं श्रवण और मंत्रोच्चार जैसे भक्ति प्रक्रियाओं का प्रचार करके जीवित प्राणियों के शाश्वत धार्मिक सिद्धांतों को पुनः स्थापित करता हूँ। जब मैं कहता हूँ, "मैं प्रत्येक सहस्राब्दी में प्रकट होता हूँ," तो यह स्वीकार करना होगा कि मैं कलियुग में भी प्रकट होता हूँ। कलियुग के लिए अवतार मंत्रोच्चार की प्रक्रिया के माध्यम से प्रेम के दुर्लभ प्राप्त वरदान को वितरित करेगा। यद्यपि यह अवतार सर्वश्रेष्ठ है, फिर भी यह सामान्य व्यक्ति के लिए छिपा हुआ है। मेरे महान भक्त स्वाभाविक रूप से इस अवतार से आकर्षित होंगे। आप भी (हे अर्जुन) इस अवतार को देख सकते हैं जब आप उनके सहायक के रूप में प्रकट होते हैं। कलियुग के लिए इस गोपनीय अवतार का महान रहस्य यह है कि वह केवल राक्षसों की पापी मानसिकता को नष्ट करेगा, स्वयं राक्षसों को नहीं। (श्रीमद भक्तिविनोद ठाकुर)
