श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान का अवतरण  »  श्लोक 176
 
 
श्लोक  1.2.176 
শ্রী-নারদ-রূপে বীণা ধরি’ কর গান
ব্যাস-রূপে কর নিজ-তত্ত্বের ব্যাখ্যান
श्री-नारद-रूपे वीणा धरि’ कर गान
व्यास-रूपे कर निज-तत्त्वेर व्याख्यान
 
 
अनुवाद
“नारद के रूप में आप वीणा लेकर अपनी महिमा का गान करते हैं और व्यास के रूप में आप अपने विषय में सत्य बताते हैं।
 
“As Narada you sing your glories with the Veena and as Vyasa you tell the truth about yourself.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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