| श्री चैतन्य भागवत » खण्ड 1: आदि-खण्ड » अध्याय 2: भगवान का अवतरण » श्लोक 158 |
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| | | | श्लोक 1.2.158  | এতেকে কে বুঝে, প্রভু, তোমার কারণ?
আপনি সে জান তুমি আপনার মন | एतेके के बुझे, प्रभु, तोमार कारण?
आपनि से जान तुमि आपनार मन | | | | | | अनुवाद | | अतः हे मेरे प्रभु, आपके प्रकट होने का कारण आपके अतिरिक्त और कौन जान सकता है? | | | | So, O my Lord, who else but You can know the reason for Your appearance? | | ✨ ai-generated | | |
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