| श्री चैतन्य भागवत » खण्ड 1: आदि-खण्ड » अध्याय 2: भगवान का अवतरण » श्लोक 155 |
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| | | | श्लोक 1.2.155  | তোমার যে ইচ্ছা, কে বুঝিতে তার পাত্র?
সৃষ্টি, স্থিতি, প্রলয—তোমার লীলা-মাত্র | तोमार ये इच्छा, के बुझिते तार पात्र?
सृष्टि, स्थिति, प्रलय—तोमार लीला-मात्र | | | | | | अनुवाद | | "आपकी परम इच्छा को कौन समझ सकता है? सृजन, पालन और संहार तो आपकी लीला के अंग हैं। | | | | "Who can understand Your supreme will? Creation, preservation and destruction are parts of Your play. | | ✨ ai-generated | | |
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