श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान का अवतरण  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.2.13 
অচিন্ত্য, অগম্য কৃষ্ণ-অবতার-লীলা
সেই ব্রহ্মা ভাগবতে আপনে কহিলা
अचिन्त्य, अगम्य कृष्ण-अवतार-लीला
सेइ ब्रह्मा भागवते आपने कहिला
 
 
अनुवाद
श्रीमद्भागवत में भगवान ब्रह्मा ने निष्कर्ष निकाला है कि कृष्ण के अवतारों की लीलाएँ अकल्पनीय और दुर्गम हैं।
 
In the Srimad Bhagavatam, Lord Brahma concludes that the pastimes of Krishna's incarnations are unimaginable and inaccessible.
तात्पर्य
माँ यशोदा ने जब अपने पुत्र के मुख में ब्रह्मांड देखा, तो उन्होंने उनको इस प्रकार नमस्कार किया: "मैं उस अविज्ञेय और अव्यक्त रूप को नमन करती हूँ, जिसमें गुणविहीन होते हुए भी सभी गुणों की आत्मा वास करती है, जिसमें सारे ब्रह्मांड समाए हुए हैं और जो परम ब्रह्म है।" भगवान ब्रह्मा भी श्रीमद भागवतम् के दसवें कांड के चौदहवें अध्याय में घोषित करते हैं कि भगवान के लीलाएँ अगम्य और अगोचर हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)