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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 1: आदि-खण्ड
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अध्याय 2: भगवान का अवतरण
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श्लोक 126
श्लोक
1.2.126
অন্ন ভাল-মতে কারো না রুচযে মুখে
জগতের ব্যবহার দেখি’ পায দুঃখে
अन्न भाल-मते कारो ना रुचये मुखे
जगतेर व्यवहार देखि’ पाय दुःखे
अनुवाद
लोगों का व्यवहार देखकर भक्त इतने दुखी हो गए कि उनकी खाने की इच्छा ही समाप्त हो गई।
Seeing the behavior of the people, the devotees became so sad that they lost their desire to eat.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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