श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान का अवतरण  »  श्लोक 122
 
 
श्लोक  1.2.122 
এই-মত অদ্বৈত বলেন অনুক্ষণ
সঙ্কল্প করিযা পূজে কৃষ্ণের চরণ
एइ-मत अद्वैत बलेन अनुक्षण
सङ्कल्प करिया पूजे कृष्णेर चरण
 
 
अनुवाद
इस प्रकार श्री अद्वैत आचार्य ने निरंतर दृढ़ निश्चय के साथ कृष्ण के चरणकमलों की पूजा की।
 
Thus Sri Advaita Acharya continuously worshipped the lotus feet of Krishna with firm determination.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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