श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान का अवतरण  »  श्लोक 107
 
 
श्लोक  1.2.107 
সকল বৈষ্ণব মেলি’ আপনি অদ্বৈত
প্রাণি-মাত্র কারে কেহ নারে বুঝাইতে
सकल वैष्णव मेलि’ आपनि अद्वैत
प्राणि-मात्र कारे केह नारे बुझाइते
 
 
अनुवाद
श्री अद्वैत आचार्य ने अन्य वैष्णवों के साथ मिलकर लोगों को उपदेश देने का प्रयास किया, परन्तु वे कुछ भी समझ नहीं सके।
 
Sri Advaita Acharya along with other Vaishnavas tried to preach to the people, but they could not understand anything.
तात्पर्य
श्री अद्वैत प्रभु और वैष्णवों ने इस संसार के लोगों को आत्मसाक्षात्कार के विज्ञान को समझाने की कोशिश की, लेकिन कोई उन्हें समझ नहीं सका।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)