श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान का अवतरण  »  श्लोक 105
 
 
श्लोक  1.2.105 
দুই চারি দণ্ড থাকি’ অদ্বৈত-সভায
কৃষ্ণ-কথা-প্রসঙ্গে সকল দুঃখ যায
दुइ चारि दण्ड थाकि’ अद्वैत-सभाय
कृष्ण-कथा-प्रसङ्गे सकल दुःख याय
 
 
अनुवाद
वे अद्वैत प्रभु के घर में कुछ घंटों के लिए एक साथ रहते थे और कृष्ण के विषयों के साथ अपने दुख को कम करते थे।
 
They used to stay together for a few hours in Advaita Prabhu's house and alleviate their sorrow with the topics of Krishna.
तात्पर्य
भक्तगणों ने अद्वैत प्रभु के सांनिध्य में एक या दो घंटे व्यतीत किये और कृष्ण कथा के विषयों पर वार्तालाप द्वारा अपने क्लेश दूर किये।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)