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श्लोक 1.2.101  |
সবেই স্ব-ধর্ম-পর, সবেই উদার
কৃষ্ণ-ভক্তি বৈ কেহ না জানযে আর |
सबेइ स्व-धर्म-पर, सबेइ उदार
कृष्ण-भक्ति बै केह ना जानये आर |
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| अनुवाद |
| ये सभी भक्तगण अपने-अपने नियत कर्तव्यों में लगे रहते थे, वे सभी उदार थे और भगवान कृष्ण की भक्ति के अतिरिक्त उन्हें कुछ भी ज्ञात नहीं था। |
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| All these devotees were engaged in their assigned duties, they were all generous and knew nothing except devotion to Lord Krishna. |
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