श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 17: भगवान की गया यात्रा  »  श्लोक 91
 
 
श्लोक  1.17.91 
হেন কৃপা প্রভুর ঈশ্বর-পুরী-প্রতি
পুরীর্ ও নাহিক কৃষ্ণ-ছাডা অন্য-মতি
हेन कृपा प्रभुर ईश्वर-पुरी-प्रति
पुरीर् ओ नाहिक कृष्ण-छाडा अन्य-मति
 
 
अनुवाद
ईश्वर पुरी का मन कभी भी कृष्ण के चरणकमलों से विचलित नहीं हुआ, इसलिए भगवान ने उन पर ऐसी कृपा की।
 
Ishvara Puri's mind never wavered from Krishna's feet, so the Lord showered such grace on him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)