श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 17: भगवान की गया यात्रा  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  1.17.37 
বলি-শিরে আবির্ভাব হৈল যে-চরণ
সেই এই দেখ, যত ভাগ্যবন্ত জন
बलि-शिरे आविर्भाव हैल ये-चरण
सेइ एइ देख, यत भाग्यवन्त जन
 
 
अनुवाद
"ये चरणकमल बलि महाराज के सिर पर रखे गए थे। हे भाग्यशाली आत्माओं, अब उन्हीं चरणकमलों को यहाँ देखो।"
 
"These lotus feet were placed on the head of Bali Maharaja. O fortunate souls, now look at those same lotus feet here."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)