श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 17: भगवान की गया यात्रा  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  1.17.35 
চতুর্-দিকে দিব্য রূপ ধরি’ বিপ্র-গণ
করিতেছে পাদ-পদ্ম-প্রভাব বর্ণন
चतुर्-दिके दिव्य रूप धरि’ विप्र-गण
करितेछे पाद-पद्म-प्रभाव वर्णन
 
 
अनुवाद
भगवान के चरणकमलों की महिमा का वर्णन करते समय ब्राह्मण दिव्य प्राणियों के समान प्रतीत हो रहे थे।
 
While describing the glories of the Lord's lotus feet, the brahmanas appeared like divine beings.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)