श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 17: भगवान की गया यात्रा  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  1.17.31 
ব্রহ্ম-কুণ্ডে আসি’ প্রভু করিলেন স্নান
যথোচিত কৈলা পিতৃ-দেবের সম্মান
ब्रह्म-कुण्डे आसि’ प्रभु करिलेन स्नान
यथोचित कैला पितृ-देवेर सम्मान
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् भगवान ब्रह्मकुण्ड में आये, जहाँ उन्होंने स्नान किया और अपने पूर्वजों को तर्पण दिया।
 
Thereafter the Lord came to Brahmakunda, where he bathed and offered oblations to his ancestors.
तात्पर्य
भगवान द्वारा पुणपुन से लेकर गढ़ धाम में प्रवेश तक की समस्त लीलाएँ लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए ही थीं। पर यह भी अस्वीकार नहीं कि इन लीलाओं में आध्यात्मिक महत्त्व भी कम नहीं था।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)