श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 17: भगवान की गया यात्रा  »  श्लोक 106
 
 
श्लोक  1.17.106 
পুরী বলে,—“মন্ত্র বা বলিযা কোন্ কথা?
প্রাণ আমি দিতে পারি তোমারে সর্বথা”
पुरी बले,—“मन्त्र वा बलिया कोन् कथा?
प्राण आमि दिते पारि तोमारे सर्वथा”
 
 
अनुवाद
ईश्वर पुरी ने उत्तर दिया, "मंत्र की तो बात ही क्या, मैं तो अपना जीवन भी आपको दे सकता हूँ।"
 
Ishwar Puri replied, "Forget about the mantra, I can even give you my life."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)