| श्री चैतन्य भागवत » खण्ड 1: आदि-खण्ड » अध्याय 16: श्री हरिदास ठाकुर की महिमा » श्लोक 96 |
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| | | | श्लोक 1.16.96  | কাজী বলে,—“বাইশ বাজারে বেডি’ মারি’
প্রাণ লহ, আর কিছু বিচার না করি’ | काजी बले,—“बाइश बाजारे बेडि’ मारि’
प्राण लह, आर किछु विचार ना करि’ | | | | | | अनुवाद | | काजी ने जवाब दिया, "इसे बाईस बाज़ारों में पीटा जाए। इसी तरह इसकी जान ले ली जाए। यही मेरी राय है।" | | | | The Qazi replied, "He should be beaten in twenty-two markets. He should be killed in this manner. This is my opinion." | | ✨ ai-generated | | |
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