श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 16: श्री हरिदास ठाकुर की महिमा  »  श्लोक 87
 
 
श्लोक  1.16.87 
সবে এক পাপী কাজী মুলুক-পতিরে
বলিলে লাগিলা,—“শাস্তি করহ ইহারে
सबे एक पापी काजी मुलुक-पतिरे
बलिले लागिला,—“शास्ति करह इहारे
 
 
अनुवाद
केवल पापी काजी ने राजा को उकसाया और कहा, "उसे दण्ड दो।"
 
Only the sinful Qazi provoked the king and said, "Punish him."
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