vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 1: आदि-खण्ड
»
अध्याय 16: श्री हरिदास ठाकुर की महिमा
»
श्लोक 78
श्लोक
1.16.78
এক শুধ নিত্য-বস্তু অখণ্ড অব্যয
পরিপূর্ণ হৈযা বৈসে সবার হৃদয
एक शुध नित्य-वस्तु अखण्ड अव्यय
परिपूर्ण हैया वैसे सबार हृदय
अनुवाद
शुद्ध, शाश्वत, अद्वैत, अक्षय भगवान सबके हृदय में विराजमान हैं।
The pure, eternal, non-dual, imperishable God resides in everyone's heart.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd