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श्लोक 1.16.314  |
গীতা-ভাগবত লৈ’ সর্ব-ভক্ত-গণ
অন্যো’ন্যে বিচারে থাকেন সর্ব-ক্ষণ |
गीता-भागवत लै’ सर्व-भक्त-गण
अन्यो’न्ये विचारे थाकेन सर्व-क्षण |
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| अनुवाद |
| तब भक्तगण आपस में भगवद्गीता और श्रीमद्भागवत के विषयों पर निरन्तर चर्चा करते रहते थे। |
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| Then the devotees used to continuously discuss among themselves the topics of Bhagavad Gita and Shrimad Bhagwat. |
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