| श्री चैतन्य भागवत » खण्ड 1: आदि-खण्ड » अध्याय 16: श्री हरिदास ठाकुर की महिमा » श्लोक 302 |
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| | | | श्लोक 1.16.302  | এ সব বিপ্রের স্পর্শ, কথা, নমস্কার
ধর্ম-শাস্ত্রে সর্বথা নিষেধ করিবার | ए सब विप्रेर स्पर्श, कथा, नमस्कार
धर्म-शास्त्रे सर्वथा निषेध करिबार | | | | | | अनुवाद | | शास्त्रों में ऐसे ब्राह्मणों को छूने, उनसे बात करने या उन्हें सम्मान देने से मना किया गया है। | | | | The scriptures forbid touching, talking to, or giving respect to such Brahmins. | | ✨ ai-generated | | |
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