श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 16: श्री हरिदास ठाकुर की महिमा  »  श्लोक 288
 
 
श्लोक  1.16.288 
ব্যর্থ-জন্ম ইহারা নিস্তরে যাহা হৈতে
বল দেখি,—কোন্ দোষ সে কর্ম করিতে?
व्यर्थ-जन्म इहारा निस्तरे याहा हैते
बल देखि,—कोन् दोष से कर्म करिते?
 
 
अनुवाद
“मुझे बताइए, उस कार्य में क्या दोष है जिसके द्वारा व्यर्थ जन्म लेने वाले जीवों को मुक्ति मिलेगी?
 
“Tell me, what is the fault in that act by which the creatures who are born in vain will attain liberation?
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