श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 16: श्री हरिदास ठाकुर की महिमा  »  श्लोक 275
 
 
श्लोक  1.16.275 
বিপ্র বলে,—“উচ্চ-নাম করিলে উচ্চার
শত-গুণ পুণ্য-ফল হয, কি হেতু ইহার?”
विप्र बले,—“उच्च-नाम करिले उच्चार
शत-गुण पुण्य-फल हय, कि हेतु इहार?”
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण ने पूछा, “उच्च स्वर में जप करने से सौ गुना अधिक लाभ कैसे प्राप्त होता है?”
 
The Brahmin asked, “How does chanting loudly give a hundred times more benefits?”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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