श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 16: श्री हरिदास ठाकुर की महिमा  »  श्लोक 273
 
 
श्लोक  1.16.273 
উচ্চ করি’ লৈলে শত-গুণ পুণ্য হয
দোষ ত’ না কহে শাস্ত্রে, গুণ সে বর্ণন”
उच्च करि’ लैले शत-गुण पुण्य हय
दोष त’ ना कहे शास्त्रे, गुण से वर्णन”
 
 
अनुवाद
"अगर कोई ज़ोर से जप करे, तो उसे सौ गुना ज़्यादा फ़ायदा होता है। शास्त्र कभी ज़ोर से जप करने की निंदा नहीं करते, बल्कि उसकी प्रशंसा करते हैं।"
 
"If one chants loudly, he gets a hundred times more benefit. The scriptures never condemn loud chanting, but rather praise it."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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