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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 1: आदि-खण्ड
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अध्याय 16: श्री हरिदास ठाकुर की महिमा
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श्लोक 27
श्लोक
1.16.27
কখনো গর্জ্জেন অতি হুঙ্কার করিযা
কখনো মূর্চ্ছিত হৈ’ থাকেন পডিযা
कखनो गर्ज्जेन अति हुङ्कार करिया
कखनो मूर्च्छित है’ थाकेन पडिया
अनुवाद
कभी वह जोर से दहाड़ता तो कभी बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ता।
Sometimes he would roar loudly and sometimes he would fall unconscious on the ground.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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