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श्लोक 1.16.27  |
কখনো গর্জ্জেন অতি হুঙ্কার করিযা
কখনো মূর্চ্ছিত হৈ’ থাকেন পডিযা |
कखनो गर्ज्जेन अति हुङ्कार करिया
कखनो मूर्च्छित है’ थाकेन पडिया |
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| अनुवाद |
| कभी वह जोर से दहाड़ता तो कभी बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ता। |
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| Sometimes he would roar loudly and sometimes he would fall unconscious on the ground. |
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