श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 16: श्री हरिदास ठाकुर की महिमा  »  श्लोक 262
 
 
श्लोक  1.16.262 
প্রতি-দিন উচ্চারণ করিযা কি কায?”
এই-রূপে বলে যত মধ্যস্থ-সমাজ
प्रति-दिन उच्चारण करिया कि काय?”
एइ-रूपे बले यत मध्यस्थ-समाज
 
 
अनुवाद
“प्रतिदिन भगवान का नाम जपने की क्या आवश्यकता है?” इस प्रकार नास्तिकों ने भक्तों की अनेक प्रकार से निंदा की।
 
"What is the need to chant the name of God every day?" Thus the atheists criticized the devotees in many ways.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd