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श्लोक 1.16.226  |
আমার নৃত্য-সুখ ভঙ্গ করিবারে
মাত্সর্য-বুদ্ধ্যে কোন্ জনে শক্তি ধরে? |
आमार नृत्य-सुख भङ्ग करिबारे
मात्सर्य-बुद्ध्ये कोन् जने शक्ति धरे? |
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| अनुवाद |
| “किसमें इतनी शक्ति है कि ईर्ष्यावश मेरे नृत्य के आनंद में विघ्न डाल सके? |
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| “Who has the power to disturb my dancing pleasure out of jealousy? |
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