श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 16: श्री हरिदास ठाकुर की महिमा  »  श्लोक 226
 
 
श्लोक  1.16.226 
আমার নৃত্য-সুখ ভঙ্গ করিবারে
মাত্সর্য-বুদ্ধ্যে কোন্ জনে শক্তি ধরে?
आमार नृत्य-सुख भङ्ग करिबारे
मात्सर्य-बुद्ध्ये कोन् जने शक्ति धरे?
 
 
अनुवाद
“किसमें इतनी शक्ति है कि ईर्ष्यावश मेरे नृत्य के आनंद में विघ्न डाल सके?
 
“Who has the power to disturb my dancing pleasure out of jealousy?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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