| श्री चैतन्य भागवत » खण्ड 1: आदि-खण्ड » अध्याय 16: श्री हरिदास ठाकुर की महिमा » श्लोक 162 |
|
| | | | श्लोक 1.16.162  | অদ্ভুত অনন্ত হরিদাসের বিকার
আশ্রু, কম্প, হাস্য, মূর্চ্ছা, পুলক, হুঙ্কার | अद्भुत अनन्त हरिदासेर विकार
आश्रु, कम्प, हास्य, मूर्च्छा, पुलक, हुङ्कार | | | | | | अनुवाद | | हरिदास ने रोना, कांपना, हंसना, बेहोश हो जाना, रोंगटे खड़े हो जाना और दहाड़ना जैसे अंतहीन आनंदमय परिवर्तन प्रदर्शित किए। | | | | Haridasa displayed endless joyous transformations such as crying, trembling, laughing, fainting, goosebumps and roaring. | | ✨ ai-generated | | |
|
|