| श्री चैतन्य भागवत » खण्ड 1: आदि-खण्ड » अध्याय 16: श्री हरिदास ठाकुर की महिमा » श्लोक 121-122 |
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| | | | श्लोक 1.16.121-122  | হাসিযা বলেন হরিদাস মহাশয
“আমি জীলে তোমা’ সবার মন্দ যদি হয
তবে আমি মরি,—এই দেখ বিদ্যমান”
এত বলে’ আবিষ্ট হৈলা করি’ ধ্যান | हासिया बलेन हरिदास महाशय
“आमि जीले तोमा’ सबार मन्द यदि हय
तबे आमि मरि,—एइ देख विद्यमान”
एत बले’ आविष्ट हैला करि’ ध्यान | | | | | | अनुवाद | | हरिदास मुस्कुराये और बोले, “यदि मेरे जीवित रहने से आपको कोई समस्या होगी, तो मैं अभी अपना शरीर त्याग दूँगा।” यह कहकर हरिदास कृष्ण के गहन ध्यान में लीन हो गये। | | | | Haridas smiled and said, “If my living will cause you any trouble, I will give up my body right now.” Saying this, Haridas went into deep meditation on Krishna. | | ✨ ai-generated | | |
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