श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 16: श्री हरिदास ठाकुर की महिमा  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.16.11 
আমি-ব্রহ্ম, আমাতেই বৈসে নিরঞ্জন
দাস-প্রভু-ভেদ বা করযে কি-কারণ?”
आमि-ब्रह्म, आमातेइ वैसे निरञ्जन
दास-प्रभु-भेद वा करये कि-कारण?”
 
 
अनुवाद
"मैं परम ब्रह्म हूँ। मेरे भीतर परम सत्य विराजमान है। तो फिर स्वामी और सेवक में क्या अंतर है?"
 
"I am the Supreme Brahman. The Absolute Truth resides within me. Then what is the difference between a master and a servant?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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