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श्लोक 1.16.107  |
তথাপিহ দযা নাহি জন্মে পাপি-গণে
বাজারে-বাজারে মারে মহা-ক্রোধ-মনে |
तथापिह दया नाहि जन्मे पापि-गणे
बाजारे-बाजारे मारे महा-क्रोध-मने |
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| अनुवाद |
| फिर भी पापी पहरेदारों ने कोई दया नहीं दिखाई, और वे गुस्से में हरिदास को बाजार-बाजार पीटते रहे। |
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| Still the sinister guards showed no mercy, and in anger they continued to beat Haridas from market to market. |
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