श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 15: श्री विष्णुप्रिया के साथ विवाह  »  श्लोक 80
 
 
श्लोक  1.15.80 
মৃদঙ্গ, সানাঞি, জযঢাক, করতাল
নানা-বিধ বাদ্য-ধ্বনি উঠিল বিশাল
मृदङ्ग, सानाञि, जयढाक, करताल
नाना-विध वाद्य-ध्वनि उठिल विशाल
 
 
अनुवाद
मृदंग, सानानि, जयधक और करताल जैसे विभिन्न वाद्यों के बजने से कोलाहलपूर्ण ध्वनि उत्पन्न हुई।
 
The playing of various instruments like Mridang, Sanani, Jaidhak and Kartal created a noisy sound.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)