श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 15: श्री विष्णुप्रिया के साथ विवाह  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  1.15.62 
তবে রাজ-পণ্ডিত হৈযা হর্ষ-মতি
বলিলেন কাশীনাথ পণ্ডিতের প্রতি
तबे राज-पण्डित हैया हर्ष-मति
बलिलेन काशीनाथ पण्डितेर प्रति
 
 
अनुवाद
तब राज पंडित ने प्रसन्नतापूर्वक काशीनाथ पंडित से बात की।
 
Then Raj Pandit happily spoke to Kashinath Pandit.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)