श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 15: श्री विष्णुप्रिया के साथ विवाह  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.15.6 
প্রতি-দিন সেই ভাগ্যবন্তের আলয
পডাইতে গৌরচন্দ্র করেন বিজয
प्रति-दिन सेइ भाग्यवन्तेर आलय
पडाइते गौरचन्द्र करेन विजय
 
 
अनुवाद
गौरचन्द्र प्रतिदिन इस भाग्यशाली व्यक्ति के घर शिक्षा देने जाते थे।
 
Gaurchandra used to go to this fortunate man's house every day to teach him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)