vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 1: आदि-खण्ड
»
अध्याय 15: श्री विष्णुप्रिया के साथ विवाह
»
श्लोक 223
श्लोक
1.15.223
নিত্যানন্দ-স্বরূপের আজ্ঞা ধরি’ শিরে
সূত্র-মাত্র লিখি আমি কৃপা-অনুসারে
नित्यानन्द-स्वरूपेर आज्ञा धरि’ शिरे
सूत्र-मात्र लिखि आमि कृपा-अनुसारे
अनुवाद
मैंने नित्यानन्द स्वरूप की आज्ञा को अपने मस्तक पर स्वीकार किया है और उनकी कृपा से मैं इन लीलाओं के विषय में संक्षेप में लिख रहा हूँ।
I have accepted the order of Nityananda Swarupa on my head and by his grace I am writing briefly about these pastimes.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×